July 21, 2024

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विटामिन की आवश्यकता नाम स्रोत प्रभाव रोग

विटामिन एक सूक्ष्म मात्रिक तत्व है, हमारे  शरीर को ठीक से काम करने में मदद करने के लिए विटामिन के अलग-अलग काम होते हैं। कुछ विटामिन आपको होने वाले संक्रमणों का विरोध करने और आपकी नसों/मासपेशियो को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं,
विटामिन की आवश्यकता नाम स्रोत प्रभाव रोग

 

विटामिन की आवश्यकता नाम स्रोत प्रभाव रोग

 

विटामिन की आवश्यकता :- जब भी हम बीमार होते है , या शरीर में दूसरी कोई समस्या होती है तो डॉक्टर के पास जाते है तो डॉक्टर हमें मल्टी विटामिन्स (multi vitamins) लेने को बोलते है | जिम , योग , कसरत आदि करते है तब भी कोच, इंस्ट्रक्टर,ट्रेनर  के द्वारा प्रोटीन के साथ-साथ मल्टी विटामिन्स लेने को कहा जाता है , तो कभी आप के दिमाग में कुछ प्रश्न जरुर आये होंगे की |

  1. मल्टी विटामिन्स (multi vitamins) या विटामिन क्या होते है ?
  2. विटामिन कितने प्रकार के होते है ?
  3. विटामिन कितने होते है ?
  4. विटामिन के क्या कार्य है ?
  5. विटामिन के रासायनिक नाम क्या है  ?
  6. विटामिन की आवश्यकता क्यों है ?
  7. विटामिन के स्रोत कौन-कौन से है ?
  8. विटामिन की कमी से कौन कौन से रोग होते है ?
  9. किस विटामिन का शरीर के किस भाग पर प्रभाव पड़ता है ?

विटामिन क्या है ?

विटामिन एक प्रकार के कार्बनिक यौगिक है | मानव शरीर विटामिन को स्वयं नहीं बना सकता है इसके लिए विटामिन को शरीर के बाहर से भोज्य प्रदार्थ के रूप में लिया जाता है , जो शरीर में सूक्ष्म मात्रिक रूप में आवश्यकता है |

विटामिन कितने प्रकार के होते है ?

विटामिन को उनकी घुलनशीलता के आधार पर दो भागो में बांटा गया है |

  1. जल में घुलनशील- जल में घुलने वाले विटामिन , जो शरीर में कम समय तक ही संगृहीत होते है | (विटामिन-B  विटामिन-C  )
  2. वसा में घुलनशील – वसा में घुलने वाले विटामिन, जो शरीर में अधिक समय तक संगृहीत होते है | ( विटामिन-A विटामिन-D विटामिन-K विटामिन-E)

विटामिन कितने होते है ?

ये प्रश्न बहुत बार दिमाग में आता है विटामिन कितने होते है ?, तो मुख्यतया आवश्यकता विटामिन की संख्या छ: (six) होती है (विटामिन-A विटामिन-B विटामिन-C विटामिन-D विटामिन-E विटामिन-K  ) लेकिन इनमे से विटामिन-B जिसे विटामिन-B काम्प्लेक्स कहा जाता है , वो स्वयं आठ (eight) प्रकार का होता है ,( विटामिन-B1, विटामिन-B2, विटामिन-B3, विटामिन-B5, विटामिन-B6, विटामिन-B7, विटामिन-B9, विटामिन-B12 )

अंततः हम कह सकते शरीर के लिए आवश्यकता विटामिन की संख्या 13 होती है |

 

विटामिन के क्या कार्य है ?

जैसा की हम जानते है की विटामिन एक सूक्ष्म मात्रिक तत्व है, हमारे  शरीर को ठीक से काम करने में मदद करने के लिए विटामिन के अलग-अलग काम होते हैं। कुछ विटामिन आपको होने वाले संक्रमणों का विरोध करने और आपकी नसों/मासपेशियो को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं, जबकि अन्य आपके शरीर को भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं या  रक्त के थक्के की कार्य विधि की सुचारू रूप से काम करने में  मदद करते  हैं।

 

विटामिन के रासायनिक नाम क्या है  ?

विटामिन रासायनिक नाम
विटामिन Aरेटिनॉल (Retinol)
विटामिन B1थायमिन (Thiamin)
विटामिन B2राइबोफ्लेविन (Riboflavin)
विटामिन B3नियासिन (Niacin)
विटामिन B5पैंथोथेटिक अम्ल (Pantothenic Acid)
विटामिन B6पाइरिडोक्सिन(pyridoxine)
विटामिन B7बायोटिन (Biotin)
विटामिन B9फोलिक एसिड (Folic Acid)
विटामिन B12कोबालामिन (Cobalamin)
विटामिन Cएस्कार्बिक अम्ल (Ascorbic acid)
विटामिन Dकैल्सिफेरॉल (Calciferol)
विटामिन Eटोकोफेरॉल (Tocopherol)
विटामिन Kफिलोक्वीनोन ( Phylloquinone)
विटामिन का रासायनिक नाम

 

विटामिन के स्त्रोत कौन-कौन से है ?

विटामिन A

विटामिन A वसा में घुलनशील विटामिन है जो स्वाभाविक रूप से कई खाद्य पदार्थों में मौजूद होता है। विटामिन A सामान्य दृष्टि, प्रतिरक्षा प्रणाली, प्रजनन और वृद्धि और विकास के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन A हमारे दिल, फेफड़े और अन्य अंगों को ठीक से काम करने में भी मदद करता है। कैरोटेनॉयड्स वर्णक होते हैं जो पीले, नारंगी और लाल फलों और सब्जियों को अपना रंग देते हैं। हमारे शरीर कुछ कैरोटेनॉयड्स को विटामिन A में बदलने में सक्षम है।

विटामिन A के स्रोत

विटामिन A मछली, अंग मांस (जैसे यकृत), डेयरी उत्पादों और अंडों में पाया जाता है इसके साथ हरी पत्तेदार सब्जियां और अन्य हरी, नारंगी और पीली सब्जियां, जैसे पालक, शकरकंद, गाजर, ब्रोकली ,खरबूजे, आम और खुबानी सहित फल डेयरी उत्पाद, जैसे दूध और पनीर अनाज आदि  में पाया जाता है |

विटामिन ए की कमी का सबसे आम लक्षण एक आंख का कमजोर होना है, जिसे ज़ेरोफथाल्मिया कहा जाता है। ज़ेरोफथाल्मिया कम रोशनी में देखने में असमर्थता हो जाती है, और अगर इसका इलाज नहीं किया जाता है तो यह अंधेपन का कारण बन सकता है।

विटामिन ए की लंबे समय तक कमी से सांस की बीमारियों (जैसे निमोनिया) और संक्रमण (जैसे खसरा और दस्त) का खतरा भी बढ़ सकता है। यह एनीमिया भी पैदा कर सकता है (ऐसी स्थिति जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं करती हैं)। गंभीर मामलों में, पर्याप्त विटामिन ए नहीं मिलने से आपके मरने की संभावना बढ़ सकती है ,इसके लिए   विटामिन की A आवश्यकता होती है |

विटामिन B

सभी विटामिन में से विटामिन बी एक ऐसा विटामिन है जिसकी सबसे अधिक आवयशकता होती है तथा विटामिन B के सबसे ज्यादा प्रकार की खोज हुई है | विटामिन B के अब तक आठ (eight) प्रकार का ज्ञान हो गया है  ,( विटामिन-B1, विटामिन-B2, विटामिन-B3, विटामिन-B5, विटामिन-B6, विटामिन-B7, विटामिन-B9, विटामिन-B12 ) (विटामिन B के नाम उपर सारणी में दिए गये है )

विटामिन B के स्रोत

विटामिन बी कॉम्प्लेक्स के स्रोतों में टमाटर, भूसी दार गेहूँ का आटा, अण्डे की जर्दी, हरी पत्तियों का साग, बादाम, अखरोट,  चावल, पौधों के बीज, सुपारी, नारंगी, अंगूर, दूध, सेम,  मटर, दाल, वनस्पति साग-सब्जी, आलू, मेवा, खमीर, मक्का , चना, नारियल, पिस्ता, ताजे फल, दही, पालक, बन्दगोभी, मछली, अण्डे की सफेदी, चावल की भूसी, फलदार सब्जी आदि आते हैं।

विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की कमी से  हाथ पैरों की उँगलियों में सनसनाहट होना, मस्तिष्क की स्नायु में सूजन व दोष होना, पैर ठंडे व गीले होना, सिर के पिछले भाग में स्नायु दोष हो जाना, मांसपेशियों का कमजोर होना, हाथ पैरों के जोड़ अकड़ना, शरीर का वजन घट जाना, नींद कम आना, मूत्राशय सम्बंधित, महामारी की खराबी होना, शरीर पर लाल चकते निकलना, दिल कमजोर होना, शरीर में सूजन आना, सिर चकराना, नजर कम हो जाना, पाचन क्रिया की खराबी होना, इसके लिए  विटामिन की B आवश्यकता होती है |

विटामिन C

विटामिन C जिसे एस्कॉर्बिक एसिड के रूप में भी जाना जाता है, पानी में घुलनशील पोषक तत्व है। शरीर में, यह एक एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करता है, कोशिकाओं को मुक्त कणों (Free Radicals) से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करता है। मुक्त कण (Free Radicals) यौगिक तब बनते हैं जब हमारा शरीर हमारे द्वारा खाए गए भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करता है इसके अलावा लोग सिगरेट के धुएं, वायु प्रदूषण और सूर्य से पराबैंगनी प्रकाश से पर्यावरण में मुक्त कणों (Free Radicals) के संपर्क में भी आते हैं।

विटामिन C के स्रोत

फल और सब्जियां विटामिन सी का सबसे अच्छे स्रोत हैं। खट्टे फल (जैसे संतरे और अंगूर) और उनके रस, साथ ही लाल और हरी मिर्च और कीवीफ्रूट, जिनमें बहुत अधिक विटामिन सी होता है।
अन्य फल और सब्जियां- जैसे ब्रोकोली, स्ट्रॉबेरी, कैंटालूप, बेक्ड आलू और टमाटर- जिनमें विटामिन सी भी होता है।

कैंसर की रोकथाम और उपचार
फलों और सब्जियों से विटामिन सी के उच्च सेवन वाले लोगों को कई प्रकार के कैंसर, जैसे फेफड़े, स्तन और पेट के कैंसर होने का कम जोखिम होता है।

(ह्रदय सबंधित रोग ) Cardiovascular disease
जो लोग अधिक मात्रा में फल और सब्जियां खाते हैं उनमें हृदय रोग का जोखिम कम होता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि  खाद्य पदार्थों में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा मुख्य रूप से इसमें सहायक हो सकती है  क्योंकि ऑक्सीडेटिव क्षति हृदय रोग का एक प्रमुख कारण है।

विटामिन D

विटामिन D एक पोषक तत्व है जो हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है । यह हमारे शरीर को कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है,  कैल्शियम मजबूत हड्डियों के लिए मुख्य बिल्डिंग ब्लॉक्स में से एक है। कैल्शियम के साथ, विटामिन डी आपको ऑस्टियोपोरोसिस रोग से बचाने में मदद करता है,

विटामिन D के अन्य नाम हैं –

  • विटामिन डी2 या एर्गोकैल्सिफेरॉल (Vitamin D2 or Ergocalciferol)
  • विटामिन डी3 या कोलेकेल्सिफेरोल (Vitamin D3 or Cholecalciferol)

ऑस्टियोपोरोसिस-  एक ऐसी बीमारी जो हड्डियों को पतला और कमजोर करती है और हड्डियों के टूटने की संभावना अधिक होती है।

हमारे शरीर को अन्य कार्यों के लिए भी विटामिन डी की आवश्यकता होती है। हमारी मांसपेशियों को इसे स्थानांतरित करने की आवश्यकता होती है, और हमारी नसों और मस्तिष्क को  शरीर के बीच संदेश ले जाने के लिए विटामिन D की आवश्यकता होती है। हमलावर बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने के लिए आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी विटामिन डी की आवश्यकता होती है।

विटामिन D के स्रोत

बहुत कम खाद्य पदार्थों में स्वाभाविक रूप से विटामिन D होता है, कई पौधों पर आधारित विकल्प जैसे सोया दूध, बादाम का दूध और जई का दूध में विटामिन डी होता है , इसके अलावा जीव रूप में फैटी फिश (जैसे ट्राउट, सैल्मन, ट्यूना और मैकेरल) और फिश लिवर ऑयल विटामिन डी के सबसे अच्छे प्राकृतिक स्रोतों होते है |

इसके अलावा विटामिन D जब हमारी खुली त्वचा धूप के संपर्क में आती है तो आपका शरीर विटामिन डी बनाता है। अधिकांश लोगों को इस तरह कम से कम कुछ विटामिन डी मिलता है।

बच्चों में, विटामिन डी की कमी से रिकेट्स होता है, एक ऐसी बीमारी जिसमें हड्डियाँ नरम, कमजोर, विकृत और दर्दनाक हो जाती हैं। किशोरों और वयस्कों में, विटामिन डी की कमी ऑस्टियोमलेशिया का कारण बनती है, एक विकार जो हड्डियों में दर्द और मांसपेशियों की कमजोरी का कारण बनता है इसके लिए  विटामिन की D आवश्यकता होती है |

विटामिन E

विटामिन E एक वसा में घुलनशील पोषक तत्व है जो कई खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। शरीर में, यह एक एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करता है, 

शरीर को अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए विटामिन E की भी आवश्यकता होती है ताकि वह हमलावर बैक्टीरिया और वायरस से लड़ सके। यह रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने और रक्त को उनके भीतर थक्का बनने से रोकने में मदद करता है। इसके अलावा, कोशिकाएं एक दूसरे के साथ बातचीत करने और कई महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए विटामिन ई का उपयोग करती हैं।

विटामिन E के स्रोत

सूरजमुखी, और कुसुम के तेल जैसे वनस्पति तेल विटामिन E के सर्वोत्तम स्रोतों में से हैं। मकई और सोयाबीन के तेल सिमित  मात्रा में विटामिन ई प्रदान करते हैं।
नट्स (जैसे मूंगफली, हेज़लनट्स और विशेष रूप से बादाम) और बीज (जैसे सूरजमुखी के बीज) भी विटामिन E के सर्वोत्तम स्रोतों में से हैं।
हरी सब्जियां, जैसे पालक और ब्रोकली, कुछ विटामिन E प्रदान करती हैं।

विटामिन ई की कमी सामान्यता बहुत की कम देखने को मिलती है | लेकिन विटामिन ई की कमी से तंत्रिका और मांसपेशियों की क्षति हो सकती है जिसके परिणामस्वरूप बाहों और पैरों में महसूस करने में कमी, शरीर की गति नियंत्रण में कमी, मांसपेशियों में कमजोरी और दृष्टि की समस्याएं हो सकती हैं। कमी का एक और संकेत एक कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली है।

विटामिन K

विटामिन K एक पोषक तत्व है जिसकी शरीर को स्वस्थ रहने के लिए आवश्यकता होती है। यह रक्त के थक्के और स्वस्थ हड्डियों के लिए महत्वपूर्ण है और शरीर में अन्य कार्य भी करता है।

विटामिन K के स्रोत

विटामिन K हरी पत्तेदार सब्जियां, जैसे पालक, केल, ब्रोकली और लेट्यूस वनस्पति तेल कुछ फल, जैसे ब्लूबेरी और अंजीर मांस, पनीर, अंडे और सोयाबीन आदि में पाया जाता है | 

विटामिन K की कमी से चोट लगने और रक्तस्राव की समस्या हो सकती है क्योंकि रक्त को थक्का जमने में अधिक समय लगेगा । विटामिन K की कमी से हड्डियों की ताकत कम हो सकती है और ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा बढ़ सकता है क्योंकि स्वस्थ हड्डियों के लिए शरीर को विटामिन के की आवश्यकता होती है। वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि क्या रक्त में विटामिन K का निम्न स्तर कोरोनरी हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाता है, शायद रक्त वाहिकाओं को बनाकर जो हृदय को कठोर और संकरा बनाती हैं।

बाजार में मिलने वाले मल्टी विटामिन 

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चेतावनी ==> बाजार से मिलने वाले किसी भी ड्रग्स / मेडिसिन का प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले |

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विटामिन की कमी से कौन कौन से रोग होते है ?

विटामिन A ==> रतौंधी,  जीरोप्‍थैलमिया, मोतियाबिंद, 
विटामिन B1==> बेरी बेरी
विटामिन B2 ==>किलोसिस ,त्‍वचा का फटना, आँखों का लाल होना
विटामिन B3 ==>त्‍वचा पर दाद होना
विटामिन B5 ==>बाल सफेद होना, मंदबुद्धि होना
विटामिन B6 ==> त्‍वचा रोग,तंत्रिका तंत्र सम्बंधित 
विटा‍मिन B7 ==>लकवा, शरीर में दर्द, बालों का गिरना
विटा‍मिन B9 ==>एनीमिया,पेचिस रोग                                                                                                                  विटामिन B12 ==> पांडुरोग रोग
विटामिन C ==>स्कर्वी
विटामिन D ==>रिकेट्स, ऑस्टियोमलेशिया
विटामिन E ==>जनन शक्ति का कम होना
विटामिन K ==>  रक्‍त का थक्‍का न जमना

किस विटामिन का शरीर के किस भाग पर प्रभाव पड़ता है ?

विटामिन A  –>  वृद्धि रुकना रतौंधी व जीरफ्थेल्मिया, संक्रमण के प्रति प्रभाव्यता, त्वचा और झिल्लियों में परिवर्तन का आना,  दोषपूर्ण दाँत आदि।
विटामिन B1 –>  वृद्धि का रुकना, भूख और वजन का घटना, तंत्रिका विकास, बेरी-बेरी, थकान का होना, बदहजमी, पेट की खराबी आदि।
विटामिन B2 –>  वृद्धि का रुकना, धुधली दृष्टि का होना, जीभ पर छाले का पड़ जाना, असमय बुढ़ापा आना, प्रकाश न सह पाना आदि।
विटामिन B3 –> जीभ का चिकनापन, त्वचा पर फोड़े फुंसी होना, पाचन क्रिया में गड़बड़ी, मानसिक विकारों का होना आदि।
विटामिन B5 –> पेशियों में लकवा, पैरों में जलन आदि।
विटामिन B6 –> त्वचा रोग, मस्तिष्क का ठीक से काम ना करना, शरीर का भार कम होना, अनीमिया आदि।
विटामिन B7 –> लकवा की शिकायत, शरीर में दर्द, बालों का गिरना तथा वृद्धि में कमी आदि।
विटामिन B12 –> रुधिर की कमी।
विटामिन C –> मसूड़े फूलना, अस्थियों के चारों ओर श्राव, जरा सी चोट पर रुधिर निकलना (स्कर्वी), अस्थियाँ कमजोर होना आदि।
विटामिन D –> सूखा रोग (रिकेट्स), कमजोर दाँत, दाँतों का सड़ना आदि।
विटामिन E –> जनन शक्ति का कम होना।
विटामिन K –> रुधिर का स्राव होना, ऐंठन, हीमोफीलिया आदि।
फोलिक एसिड –> अनीमिया तथा पेचिश रोग होता है।

विटामिन से सम्बंधित सामान्य प्रश्न 

  • जल में घुलनशील विटामिन कौन -कौन से है ?

    • विटामिन B विटामिन C
  • वसा में घुलनशील विटामिन कौन -कौन से है ?

    • विटामिन A विटामिन D विटामिन-K विटामिन E
  • विटामिन A की कमी से होने वाला रोग कौन सा है ?

    • रतौंधी,  जीरोप्‍थैलमिया
  • विटामिन C की कमी से होने वाला रोग कौन सा है ?

    • स्कर्वी
  • किवी फ्रूट में कौन सा विटामिन पाया जाता है ? 

    • विटामिन C,  कुछ मात्र में विटामिन B भी पाया जाता है  
  • किस विटामिन की कमी से हड्डिया कमजोर होती है ?

    • विटामिन D
  • किस रोग को सुखा रोग कहा जाता है ?

    • रिकेट्स
विटामिन की आवश्यकता नाम स्रोत प्रभाव रोग

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