December 1, 2020

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राजस्थान साहित्य

राजस्थान साहित्य के साहित्यकार और कवि 

1. ख्यात :-

इतिहास परक रचना जिसका प्रचलन अकबर के आदेश पर हुआ। प्राचीनतम ख्यात मुहणौत नैणसी री ख्यात मानी जाती है।
दयालदास री ख्यात या बीकानेर की राठौडा री ख्यात – अंतिम ख्यात मानी जाती है।

2. रासौ :-

केवल वीर या श्रंगार प्रधान। 

 

काव्यकवि
पृथ्वीराज रासौचन्दरबरदईं ( पृथ्वी का पहोबा युद्ध )
परमाल रासौजगनिक
विजयपाल रासौनल्लसिंह ( करौली के शासक का )
बीसलदेव रासौनरपति नाल्ह (चौहान शासक विग्रहराज चथुर्त और भोज परमार की पु़त्री रजमति का वर्णन)
खुमाण रासोदलपत या दौलत विजय ( मेवाड राजाओ का वर्णन बप्पारावल से राजसिंह )
हम्मीर महाकाव्यनयनचंद्र सुरी
हमीर रासोजोधराज
हमीर हठ सुर्जन चरित्रचन्द्रशेखर
हमीरायणभांडड व्यास
हमीरोत्सर्गबैंकुठनाथ शास्त्री
हमीर मान मर्दनजयसिंह
सगतसिध रासोगिरधर दास
शत्रुशाल रासोडुंगरसी
छात्रपति रासोकाशी छांगाणी ( मतीरे की राड का वर्णन )
कमान खां रासोजानकवि ( मूलनाम-न्यामत खां फतेहपुर )
रामरासोमाधोदास
बुद्धि रासोजल्ह

3.वेलि :-

ऐसी रचना जिसमें किसी शासक या सामंत की उपलिब्धयों के साथ प्रेम भावना का वर्णन होता हैं।
वेलि किसन रूकमणी री – पृथ्वीराज राठौड़

4. वचनिका :-

गध-पद्य मिश्रित-तुकांतर रचना

1 अचलदास खींची री वचनिकाशिवदास गाडण
इसमे गागरोन के शासक अचलदास खींचि व मांडु
के सुल्तान अलपखां या होशंग शाह के बीच य़द्ध
का वर्णन किया।
2 वचनिका रतनसिह राठौड़ महेश दासोत रीलेखक जगा खिड़िया

5. दवावैत :-

ऐसी रचना जिसमें अरबी फारसी की रचना में किसी की प्रशंसा की जाती है।

6. मरसया :-

किसी शासक या सामन्त की मृत्यु पर लिखी जाने वाली शोक परक रचना ।

7. प्रकाश :-

वंश या लोकनायक के जीवन चरित्र का चमत्कारिक वर्णन ।

पाबू प्रकाशआशिया मोडजी ।

8. विलास :-

किसी शासक या सामंत की उपलब्धियां के साथ आमोद – प्रमोद का भी वर्णन होता है।
बलवंत विलाससूर्यमल्ल मिश्रण

9. बात :-

कथा परक रचना
वीरमदेव सोनागरा री वातपद्यमनाभ

10. परची :-

लोक संत के जीवन चरित्र का काव्यमय वर्णन।
रैदास री परची

जाभोजी री परची।

– राजस्थानी भाषा की प्राचीनतम रचना – वज्रसेन सुरी की भरतेश्वर बाहुबली घोर (1168 ई. ) मानी जाती है।

– राजस्थानी भाषा का पहला नाटक – शिवचंद भरतिया का केसर विलास माना जाता है।

– संवतोल्लेखन की प्रथम रचना – शालिभद्र सुरी की भरतेश्वर बाहुबली रास ( 1184 ई. ) मानी जाती है।

– राजस्थानी भाषा का पहला उपन्यास – शिवचंद भरतिया का कनक सुंदर माना जाता है।

– पहली कहानी – शिवचंद भरतिया की विश्रांत प्रवासी (1904 ई.)

– पहला व्याकरण – प.रामकरण आसोपा द्वारा तैयार किया गया।

– पहला शब्दकोश – सीताराम लालस द्वारा तैयार किया गाया।

– राजस्थानी भाषा की आधुनिक काव्य रचना – चन्द्रसिंह बिरकाली बादली है।

– राजस्थानी लोक गीतों का संकलन  – प्ररूषोतक लाल मेपारिया द्वारा किया गया।

– राजस्थानी कहावतों का संकलन – मुरलीधर व्यास ने किया।

राजस्थानी भाषा के कुछ कवियों का वर्णन

1. पृथ्वीराज राठौड़ –

बीकोनर के राव कल्याणमल के पुत्र अकबर के द्वारा गागरोन की जागीर दी।
– पीथल उपनाम से कविता करते थे।
-टेस्सीटोरी ने पृथ्वीराज राठौड़ को डिंगल का होरेस कहा
– पृथ्वीराज राठौड़ सम्मान राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर द्वारा दिया जाता है।
– वेलिक्रिसन रूकमणी री- दुरसा आढा ने इसे 5 वॉ वेद और 19 वॉं पुराण कहा ।

2. कविश्यामलदास :-

राजस्थान के राजस्थानी के एकमात्र कवि जिन्हे केसरे हिंद की उपाधि दी गई।
– इन्होने वीर विनोद शीर्षक से उदयपुर रियासत का इतिहास लिखा ।

3. सुर्यमल्ल मिश्रण :-

बूंदी के रामसिंह के दरबारी कवि।
-वीर रसावतार के रूप में जाने जाते है।
– 1857 की क्रांति का आंखां देखा हाल लिखा।
– सुर्यमल्ल मिश्रण पुरस्कार प्रतिवर्ष भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर द्वारा दिया जाता है
– रचनाएं :- वीर सतसई, वंश भास्कर, रामरजांट, बलवंत विलास, सतीरासो।

4. डॉ. लुई पैन्जियो टैस्सीटोरी :-

जन्म इटली के उदिने शहर में।
– बीकानेंर में रहकर राजस्थानी भाषा साहित्य एवं पुरात्तव पर काम किया।
– टैस्सीटोरी के जीवन पर आधारित उपन्यास धोरो रा धोरो, श्रीलाल नथमल जोशी द्वारा लिखा गया।

5. कन्हैया लाल सेठिया :-

जन्म-सुजानगढ़ (चुरू)
– राजस्थानी भाषा में एकमात्र कति जिन्हे पदमश्री दिया गया।
– मरणोपरांत 2012 में राजस्थान रत्न दिया गया ।
– 1976 में नीलटांस के लिए साहित्स अकादमी पुरस्कार दिया गया।
– धरती-धोरा री, पातल र पीथल, रमणिये रा दूहा, मीझंर (लोकगीत), कुणी जमीन रो धणी, सबद-निग्रंथ।

6. विजयदान देथा :-

उपनाम-’’बिज्जी’’
– जन्म बोरूदा (जोधपुर)
– 1947 में बातां री फुलवारी (लोक कथाएं) के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया।
2011 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन किया लेकिन नही मिला।
2012 में राजस्थान रत्न दिया गया।
– 2013 में मृत्यु।
रचना :- बाता री फुलबारी (14 भाग), दुविधा (पहेली फिल्म), प्रेरणा फिल्म, उलझन, अलेखू हिटलर तीडोराव, चोर चरणदास (बाल फिल्म)

7. लक्ष्मी कुमारी चुॅडावत :-

उपनाम-रानीजी
जन्म-देवगढ़ (राजसंमद)
– 2012 में राजस्थान रत्न
– 2014 में मृत्यु।
रचना – टाबरा री बाता , टूकारो दो सा, मूमल, मांझल रात बगड़ावत महागाथा, पाबूजी री बात, डूंगजी, जवारजी री बात, कैरे चकबा बात।

राजस्थानी भाषा की कुछ रचनाये और उनके रचनाकार

रचनारचनाकार
राव जैतसी री छंदबीठू सुजा
पाबूजी रा छंदबीठू मेहा
ढोलामारू रा दुहाकवि कल्लोज
ढोजामारू री चौपाईकवि कुशल लाभ
कान्हड़देव प्रबंधपद्मनाभ
वीरमदेव सोनगरा री बातपद्मनाभ
किरतार बावनीदुरसा आढ़ा (अकबर के दरबारी कवि)
विरूद्व छतहरदुरसा आढ़ा (महाराणा प्रताप का वर्णन)
रानी पद्मनी री चौपाईहेमरत्न सुरी
गोरा बादल चरित्रहेमरतन सुरी
सुजान चरित्रकवि सूदन (जाढ शासक सुरजमल का वर्णन)
अमर सारपं. जीवधर
सुर सतसई/हाला झाला री कुंडलियाईसरदास
एक बींदणी दो बीदंश्री लाल नथमज जोशी
आभै पटकी, धोरो रा धोरीश्री लाल नथमल जोशी
मैकती काया मुलकती धरतीअन्ना राम सुदामा
आंधे ने आख्याअन्ना राम सुदामा
पिरोल में कुती बियाईअन्ना राम सुदामा
चेतावनी रा चुंगट्या (13 सोरठा)केशरीसिह बारहठ
रूठी रानी, प्रतापचरित्र, राजसिंह चरित्रकेशरीसिह बारहठ
चवरी, किरथा, स्ेनाणी री जागती जोतमेघराज मुकुज
जनानी ड्योढ़ी,किरण शेखावत
हजार घोड़ो का असबार,टू गौरी किण पीव री,खम्मा अन्नदातायादवेंद्र शर्मा चंद्र
गवाड़मधु आचार्य (साहित्य अकादमी पुरस्कार)
राजस्थान के रणबांकुरेडॉ. राजेंद्र सिंह राठौड़ (कारगिज
के शहीदो का वर्णन)
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