March 8, 2021

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राजस्थान के संत सम्प्रदाय

राजस्थान का इतिहास प्राचीन समय से ही भक्ति और संतो के नाम से प्रसिद्ध रहा है | राजस्थान में बहुत से संत प्रसिद्ध हुए है | राजस्थान में संतो को ईश्वर के स्वरूप माना गया है , राजस्थान में बहुत सारे संत संप्रदाय है , विभिन्न प्रकार के संतो और उनकी भक्ति के विभिन्न आधारों पर संतो और उनको अनुययियो ने विभिन्न संत संप्रदाय का निर्माण किया है | राजस्थान के संत संप्रदाय निम्न प्रकार से है |

राजस्थान के संत सम्प्रदाय

      राजस्थान की भक्ति आंदोलन का प्रवर्तक संत धन्ना को माना जाता है।

      राजस्थान में शैव और वैष्णव सम्प्रदाय− शैव सम्प्रदाय(नाथ / पाशुपत )

  1. पाशुपत सम्प्रदाय − मुख्यपीठ – एकलिंग जी का मंदिर – कैलाश पुरी (उदयपुर)
  2. बैरागी नाच सम्प्रदाय− मुख्यपीठ – राताडूंगा, पुष्कर (अजमेर)
  3. मान नाथ (नाथी सम्प्रदाय)− मुख्य पीठ – महामंदिर (जोधपुर)
  4. भर्तृहरि / कनफडे नाथों की पीठ संप्रदाय –मुख्यपीठ – भर्तृहरि, अलवर

            वैष्णव सम्प्रदाय− रामावत / रामानंदी संम्प्रदाय

                      मुख्यपीठ – गलताजी, जयपुर

                      संस्थापक – कृष्णदास, पयहारी

           रसिक सम्प्रदाय – मुख्य पीठ – रेवासा(सीकर)

                       संस्थापक – अग्रदास

                      इस सम्प्रदाय में भगवान राम के रसिक रूप की पूजाकी जाती है।

          सनकादि / निम्बार्क / हंस / राधावल्लभ सम्प्रदाय

                     मुख्य पीठ – सलेमाबाद, किशनगढ (अजमेर)

                     संस्थापक – परशुराम देवाचार्य

वल्लभ सम्प्रदाय – इसकी राजस्थान में 6 पीठ है।

  1. श्री नाथ जी – श्री नाथ द्वारा
  2. श्री विट्ठलनाथ जी – श्री नाथ द्वारा
  3. श्री द्वारकाधीश जी – कांकरोली (राजसमंद)
  4. श्री मदनमोहन जी – करौली
  5. श्री मथुरेश जी – कोटा
  6. श्री गोकुल चंद जी – कामां (भरतपुर)

इस संप्रदाय में भगवान के बाल रूप की पुजा की जाती हैं॥

अर मंदीर को हवेली कहा जाता है ।

5 गडीय सम्प्रदाय:→ मुखयपीठ गाविदं देव जी का मंदिर जयपुर

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