October 31, 2020

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मनोविज्ञान के संप्रदाय | School of Psychology |

मनोविज्ञान के संप्रदाय |Schools of Psychology in hindi | manovigyan ke sampraday|   manovigyan ke school|

मनोविज्ञान के संप्रदाय (School of Psychology ): जीवो में व्यवहार से जुड़े नियमो में का अध्धयन ही मनोविज्ञान का मुख्य उद्धेश्य है | अलग-अलग वैज्ञानिको ने मनोविज्ञान की परिभाषाए भी अलग – अलग विचार दिए क्यों की सबके दृष्टिकोण भी भिन्न – भिन्न होते है इन भिन्न – भिन्न दृष्टिकोण के कारण  मनोविज्ञान के विभिन्न सम्प्रदायों  (Schools of Psychology) का निर्माण हुआ |मनोविज्ञान के संप्रदाय मनोविज्ञान के मील के पत्थर है |

मनोविज्ञान के संप्रदाय इसके इतिहास से वर्तमान की कहानी कहते है , जिससे पता चलता है की मनोविज्ञान का प्रारंभ क्या था, मनोविज्ञान दर्शन शास्त्र से  आज के आधुनिक वैज्ञानिक रूप में कैसे आया | तो चलिए जानते है मनोविज्ञान के सम्प्रदायों (School of Psychology )के बारे में |

मनोविज्ञान के संप्रदाय (Schools of Psychology )

मनोविज्ञान के कई संप्रदाय है , दर्शन काल से वैज्ञानिक काल तक मनोविज्ञान में कई प्रकार के सम्प्रदायों का निर्माण हुआ था अलग – अलग समय और स्थानों पर लोगो ने मनोविज्ञान के लिए विभिन विचार दिए जो आगे चल कर मनोविज्ञान के सम्प्रदायों (schools of Psychology) में परिवर्तित हुए जिसमे कुछ का वर्णन निम्न लिखित है |

  • संरचनावादया प्रयोगात्मक (Structuralism)
  • प्रकार्यवाद या कार्यवाद (Functionalism )
  • व्यवहारवाद((Behaviorism)
  • गेस्टाल्टमनोविज्ञान (Gestalt Psychology)
  • मनोविश्लेषण(Psychoanalysis)

मुख्य रूप से ये 5 संप्रदाय ही मनोविज्ञान में प्रचलित है लेकिन इसके साथ कुछ और भी सम्प्रदाय है जिनका मनोविज्ञान के क्षेत्र में अध्धयन किया जाता है जो निम्न है |

  • प्रयोजनवाद (Purposivism )
  • साहचर्यवाद(Associationism )
  • क्षेत्रवाद(Field psychology )

उपर्युक्त सम्प्रदायों का अध्धयन करने के मुख्य विषय संवेदना ,उपयोगिता ,समायोजन ,गमक प्रतिक्रिया(Motor Response) , प्रत्यक्षीकरण, अचेतन प्रेरक , प्रेरणा , इच्छा , स्म्रति ,तथा व्यक्ति है |

संरचनावाद या प्रयोगात्म (Structuralism) :

संरचनावाद की शुरुवात का श्रेय विलियम वुट (Wilhelm Wundt) और उसके शिष्य टिचनेर (Titchener) को दिया जाता है क्यों की इनके विचारो ने संरचनावाद की नीव रखी थी जिस पर चल कर संरचनावाद के अस्तित्व का निर्माण हुआ और संरचनावाद को अस्तित्ववाद तथा अन्तनिरीक्षणवाद (introspectionism) के नाम से भी जाना जाता है | संरचनावाद के अनुसार मनोविज्ञान की विषय-वस्तु चेतन अनुभूति (conscious experience) थी|  टिचनेने  ‘मनोविज्ञान को अनुभव करने वाले व्यक्तियों के अनुभवों का अध्धयन का विषय कहा’ |   

टिचनेने चेतना और मन में अंतर दिया , इनके अनुसार चेतना से तात्पर्य उन सभी अनुभवों से है जो किसी व्यक्ति में किसी दिए गये क्षण (Particular Time lap) में उपस्थित होते है , जबकि मन से तात्पर्य उन सभी अनुभवों से है जो मनुष्य में जन्मजात होते है |

वुन्ट ने चेतना के दो प्रकार बताये है –  1) संवेदन  2) भाव  |

संवेदना बाहय पदार्थो की होती है और भव व्यक्ति के अन्दर ही निहित होते है

जबकि टिचनेर के अनुसार चेतना के तीन प्रकार होते है – 

1) संवेदन(Sensation) 

2) भाव या अनुराग (Feeling or Affectation )

 3) प्रतिमा या प्रतिबिम्ब (Image) |

टिचनेर ने अन्तनिरीक्षण को मनोविज्ञान की प्रमुख विधि माना है |

वैसे सरंचनावाद से पूर्व मनोविज्ञान दर्शन शास्त्र से प्रभावित विषय था लेकिन संरचनावाद ने ही इसे विज्ञान के द्वार पर प्रवेश करवाया , इतना योगदान होने के बाद भी संरचनावाद वैज्ञानिक महत्त्व कम था क्यों की इसमें कुछ कमियां थी किन्तु इसका एतिहासिक महत्त्व कम नही था |

प्रकार्यवाद या कार्यवाद (Functionalism) :

प्रकार्यवाद के उदभव को ले कर आज भी विरोधाभास है अभी तक कोई निश्चित तौर पर नही कह सकता की इसकी स्थापना किस ने की लेकीन कुछ अध्धयनो के अनुसार अमेरिकी वैज्ञानिक विलियम जेम्स से इसकी शुरुआत हुई थी | इनका मानना था की मनोविज्ञान का सम्बन्ध इस बात से है की चेतना क्यों और कैसे कार्य करती है, इस बात के द्वारा जेम्स ने चेतना की कार्यात्मक उपयोगिता (Functional Utility) को बल दिया | प्रकार्यवाद के अनुसार मानसिक प्रकियाए वस्तु नही है बल्कि उनमे जो गतिशीलता है वे निरंतर रूप से धटित होती है |

प्रकार्यवाद की स्थापना के अनौपचारिक संस्थापक डिवी (Dewey), एंजिल (Angell) ,कार्र (Carr)  को माना जाता है 

वुडवर्थ के अनुसार “ वह मनोविज्ञान जो यथार्थ एवं व्यवस्थित रूप से मनुष्य क्या करता है ? वह ऐसा क्यों करता है ? प्रशनो का उत्तर देने का प्रयत्न करता है उसे  प्रकार्य मनोविज्ञान कहते है ”

व्यवहारवाद ((Behaviorism) :

व्यवहारवाद की स्थापना वाटसन (Watson) ने सन 1913 में की थी | वाटसन के अनुसार मनोविज्ञान एक वस्तुनिष्ठ (Objective) और प्रयोगात्मक (Experimental  ) विज्ञान है | इसका सैद्धांतिक उद्धेश्य व्यवहार का अंदाजा लगना और उस पर नियंत्रण करना है | व्यवहारवाद चेतना का विज्ञान ना होकर व्यवहार का विज्ञान है |

वाटसन के व्यवहारवाद के कारण ही “ उद्दीपक अनुक्रिया (Stimulus – response ) “ की उत्पति हुई | वाटसन ने दर्शन के सम्बन्ध में मन और आत्मा को मनोविज्ञान में लाना गलत समझा , इसलिए उसने अपने व्यवहारवाद में संवेदनाओ ,ज्ञानेन्द्रियो , पेशिओ और ग्रन्थियो को सम्मलित कर वस्तुनिष्ठ रूप से निरिक्षण कर योग्य तथ्यों को स्वीकारा | वाटसन एसी घटनाओ को या वस्तु को मानते थे जो दर्शय हो  महसूस की जा सकती हो या प्रत्यक्ष अनुभव की जा सकती हो | वृति एक पैदायशी गुण नही है , यह एक सहज क्रिया की धारा मात्र है | वाटसन ने मनोविज्ञान की चार प्रमुख विधियां बताई है |

प्रेक्षण (Observation) , अनुबंधन (Condition), परिक्षण (testing), और दक शाब्दिक रिपोर्ट (Verbal Report)

गेस्टाल्ट मनोविज्ञान (Gestalt Psychology) :

गेस्टाल्ट स्कूल को स्थापना मैक्स बरदाईमर (Max Wertheimer)  ने 1912 में की थी |इसके अलावा इसके सह सहयोगी कोहलर (Kohler) और कोफ्का (Koffka) थे | गेस्टाल्ट(Gestalt) शब्द एक जर्मन शब्द है जिसका अंग्रेजी में अर्थ Configuration होता है | अगर हिन्दी में इस का अर्थ कहा जाए तो आकृति (Form), आकार (Shape) तथा समाकृति (Configuration)  होता है |

इसके अनुसार मनोविज्ञान मानसिक क्रियाओ के संघटन का विज्ञान है |

इनके अनुसार मानव व्यवहार भी गत्यात्मक होता है, इन्होने ये बताया की यही शक्ति व्यक्ति में व्यव्हार का कारण होती है| बाल मनोविज्ञान में भी इसका बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है |       

मनोविश्लेषण (Psychoanalysis) :

 इस स्कूल की स्थापना का श्रेय सिगमंड फ्रायड (SSigmund Freud) को जाता है | इसमें फ्रायड का अचेतन (Unconscious) मन का सिद्धांत सबसे मुख्य था | फ्रायड ने मन को एक वैज्ञानिक रूप दे देकर समझाने का प्रयत्न किया | इसके लिए उसें मन को 3 अवस्थाओ में बाटा ज्ञात (Conscious), अर्ध ज्ञात (Pre-conscious) और अज्ञात (Unconscious)  जो आगे चल आकर इदम (id) , अहम् (Ego), पराहम (Super- Ego) में वर्गीकृत हुए |

फ्रायड ने अचेतन के बारे में अध्धयन की कुछ विधियाँ बताई थी जिसमे मुख्यत: मुक्त साहचर्य विधि (free association method), सम्मोहन (Hypnosis), तथा स्वप्न की व्याख्या (Dream interpretation) थी |

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