October 31, 2020

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कंप्यूटर लैंग्वेज और अनुवादक (Computer Language and Translator )

कंप्यूटर लैंग्वेज और अनुवादक (Computer Language and Translator )

यदि हमें किसी को भी अपनी बात समझनी हो तो उसके लिए एक माध्यम की आवश्यकता होती है जिसे हम भाषा कहते है | तो इसी प्रकार कंप्यूटर में भी हमें अपनी बात को समझाने के लिए हमें एक भाषा की आवश्यकता पड़ती है , कंप्यूटर भाषा (लैंग्वेज) को दो भागों में बांटा जाता है |

  1. Low Level Language (निम्नस्तरीय भाषा)
  2. High Level language (उच्च स्तरीय भाषा)

 

1.     Low Level language (निम्नस्तरीय भाषा)

निम्न स्तरीय भाषा कंप्यूटर के समझाने में आसान होती है |ये दो प्रकार की होती है

1.      Machine Language (मशीनी भाषा)

जैसा की हम जानते है की कंप्यूटर एक मशीन हे तो ये मशीनी भाषा को आसानी से समझ सकता है, सभी डिजिटल कंप्यूटर बाइनरी नंबर(0 और 1) को समझते है , मशीन लैंग्वेज में डाटा को सीधे ही execute करता है अत: इनकी स्पीड फ़ास्ट होती है | इस भाषा में लिखे प्रोग्राम मशीन आधारित होते है तो इसके कारण हर बार अलग – अलग मशीन यानि कंप्यूटर के लिए हर बार अलग अलग प्रोग्राम लिखना पड़ता है अर्थात एक प्रोग्राम एक ही मशीन/कंप्यूटर में चलता है | 

2.      Assembly Language (असेंबली भाषा)

इस भाषा में न्यूमोनिक कोड (mnemonics) का प्रयोग किया जाता है | न्यूमोनिक कोड छोटे – छोटे निर्देश (instruction) होते है , जो अलग अलग ऑपरेशन(कार्य) के लिए प्रयूक्त होते है | जैसे : 

 

2. High Level language (उच्च स्तरीय भाषा)

            इन भाषाओं के निर्देश अंग्रेजी भाषा में लिखे जाते है अत: इसे समझना आसान होता है, एक बार लिखे गये प्रोग्राम दुसरे कंप्यूटर में भी चलाये जा सकते है | उच्च स्तरीय भाषाएँ निम्न होती है BASIC,FORTRAN,COBOL,C,C++, तथा JAVA ,VB आदि |

  1. BASIC (Beginner’s All Purpose Symbolic Instruction code) इसका विकास 1964 में जॉन केमेनी तथा थॉमस द्वारा किया गया था , इसके बाद ही अन्य भाषाओ का निर्माण हुआ |
  2. FORTRAN (Formula Translation) इसका विकास जे डब्लू बेकस के द्वारा 1957 किया गया है |
  3. Pascal इसका विकास 1971 में निकलोस विर्थ ने किया था |
  4. COBOL (Common Business Oriented Language) इसका विकास बिज़नेस के लिए हुआ था |
  5. C Language  को बेल लेबोटरी के डेनिस रिची तथा ब्रयानकर निधम द्वारा किया गया था |
  6. C ++ को C लैंग्वेज की सहायता से ही बनाया गया है, ये ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड लैंग्वेज है |
  7. JAVA इसका विकास जेम्स गोसलिंग ने किया था ,इसका प्रयोग वेब पेज और इन्टरनेट ले लिए किया जाता है | यह एक object oriented language है |

कुछ अन्य कंप्यूटर लैंग्वेज भी है जिनका प्रयोग बहुत पहले होता था आज के समय में इन लैंग्वेज को कम जाना जाता है , जिनके नाम कुछ इस प्रकार है |

  1. Algol –(Algorithmic Language)
  2. COMAL –(Common Algorithmic Language)
  3. RPG-(Report Program Generator)
  4. LIPS-(List Processing)
  5. Prolog-(Program is Logic)
  6. Snobol-(String Oriented Symbolic Language )
  7. LOGO   

यदि हम आज के समय की बात करे तो कंप्यूटर की बहुत सारी लैंग्वेज बन गयी है जो काफी उन्नत और शक्तिशाली है , जिनका प्रयोग अलग – अलग जगह पर किया जाता है |

List of some computer language (कुछ कंप्यूटरी भाषाओ के नाम )

java script, python, JAVA , C/C++, PHP, Swift, C# (C-sharp), Ruby, SQL

 

Language Translator (भाषा अनुवादक) [Assembler, Compiler, Interpreter]

लैंग्वेज ट्रांसलेटर भी एक तरह के सोफ्टवेर होते है | जिनका प्रयोग एक भाषा को दूसरी भाषा में बदलने में किया जाता है ,

ये तीन प्रकार के होते है |

  • असेम्बलर (Assembler)
  • कम्पाइलर (Compiler)
  • इंटरप्रिटर (Interpreter)

 

असेम्बलर (Assembler):

 असेम्बली लैंग्वेज के निर्देशों (mnemonic) को मशीन लैंग्वेज में परिवर्तित करता है | इसमें बड़े कोड को नही बनाया जा सकता था , छोटे प्रोग्राम के लिए इसक प्रयोग होता था |

 

कम्पाइलर (Compiler):

ये हाई लेवल लैंग्वेज को मशीन लैंग्वेज में परिवर्तित करने का कार्य करता है, कम्पाइलर लिखे गये पुरे प्रोग्राम को एक साथ ही मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है |ये प्रोग्राम को चलने में थोडा अधिक समय लगता है तथा मेमोरी में स्थान भी अधिक घेरता है

यदि कम्पाइलर उसी कंप्यूटर में रन करता है जिसके लिए वो ऑब्जेक्ट प्रस्तुत करता है तो इसे “रेजिडेंट कम्पाइलर“  कहते है | अगर कम्पाइलर किसी दुसरे कंप्यूटर पर रन करता है और जिसके लिए ऑब्जेक्ट कोड बनता है उसे “ क्रॉस कम्पाइलर “ कहते है |

  

इंटरप्रिटर (Interpreter):

ये भी हाई लेवल लैंग्वेज को मशीन लैंग्वेज में परिवर्तित करता है , इंटरप्रिटर लिखे गये प्रोग्राम की एक एक लाइन को बदलता है | हम जितनी बार प्रोग्राम को रन करेंगे इंटरप्रिटर उसे एक एक लाइन से चेक करेगा जिसके कारण अधिक समय लगता है , वेसे इंटरप्रिटर मेमोरी में कम स्थान घेरता है क्योकि आकार में छोटा होता है |इसलिए इसे छोटे सिस्टम में चलना आसान होता है